" मेरा पूरा प्रयास एक नयी शुरुआत करने का है। इस से विश्व- भर में मेरी आलोचना निश्चित है. लेकिन इससे कोई फर्क नहीं पड़ता "

"ओशो ने अपने देश व पूरे विश्व को वह अंतर्दॄष्टि दी है जिस पर सबको गर्व होना चाहिए।"....... भारत के भूतपूर्व प्रधानमंत्री, श्री चंद्रशेखर

"ओशो जैसे जागृत पुरुष समय से पहले आ जाते हैं। यह शुभ है कि युवा वर्ग में उनका साहित्य अधिक लोकप्रिय हो रहा है।" ...... के.आर. नारायणन, भारत के भूतपूर्व राष्ट्रपति,

"ओशो एक जागृत पुरुष हैं जो विकासशील चेतना के मुश्किल दौर में उबरने के लिये मानवता कि हर संभव सहायता कर रहे हैं।"...... दलाई लामा

"वे इस सदी के अत्यंत अनूठे और प्रबुद्ध आध्यात्मिकतावादी पुरुष हैं। उनकी व्याख्याएं बौद्ध-धर्म के सत्य का सार-सूत्र हैं।" ....... काज़ूयोशी कीनो, जापान में बौद्ध धर्म के आचार्य

"आज से कुछ ही वर्षों के भीतर ओशो का संदेश विश्वभर में सुनाई देगा। वे भारत में जन्में सर्वाधिक मौलिक विचारक हैं" ..... खुशवंत सिंह, लेखक और इतिहासकार

प्रकाशक : ओशो रजनीश | सोमवार, फ़रवरी 22, 2010 | 5 टिप्पणियाँ


सदियों से यह बार-बार कहा जाता है। सारे धार्मिक लोग यह कहते रहे हैं: "हम इस जगत में अकेले आए हैं, और हम अकेले जाएंगे।' सारा साथ होना माया है। साथ होने का विचार ही इस कारण आता है क्योंकि हम अकेले हैं, और अकेलापन तकलीफ देता है। हम अपने अकेलेपन को रिश्ते में डुबो देना चाहते हैं...इसी कारण हम प्रेम में इतना उलझ जाते हैं। इस बिंदु को देखने की कोशिश करो। सामान्यतया तुम सोचते हो कि तुम पुरुष या स्त्री के प्रेम में पड़ गए क्योंकि वह सुंदर है। यह सत्य नहीं है। सत्य इसके ठीक विपरीत है: तुम प्रेम में पड़े क्योंकि तुम अकेले नहीं रह सकते। तुम्हें गिरना ही पड़ेगा। तुम अपने को इस या उस तरह से टालने ही वाले थे। और यहां ऐसे लोग हैं जो स्त्री या पुरुष के प्रेम में नहीं पड़ते--तब वे धन के प्रेम में पड़ते हैं। वे धन की तरफ या शक्ति की तरफ जाने लगते हैं, वे राजनेता बन जाते हैं। वह भी तुम्हारे अकेलेपन को टालना है। यदि तुम मनुष्य को देखो, यदि तुम स्वयं को गहराई से देखो, तुम आश्चर्यचकित होओगे--तुम्हारी सारी गतिविधियों को एक अकेले स्रोत में सिकोड़ा जा सकता है। स्रोत यह है कि तुम अपने अकेलेपन से डरते हो। बाकी सारी बातें तो बहाने मात्र हैं। वास्तविक कारण यह है कि तुम अपने को बहुत अधिक अकेला पाते हो।

किसी मोहित करने वाली शाम को आप अपने हमसफर से मिलने वाले हैं, एक पूर्ण व्यक्ति जो आपकी सारी जरूरतों को तृप्त करेगा और आपके सपनों को पूरा करेगा। ठीक? गलत! गीत लिखने वाले और कवि जो फंतासी पालते हैं उसकी जड़ें गर्भ में होती हैं, जहां हम बहुत सुरक्षित और मां के साथ एक थे; इसमें कोई आश्चर्य नहीं है कि हम अपने पूरे जीवन में उसी स्थल पर जाने की चाह रखते हैं। लेकिन, यदि कोरा सच कहा जाए तो यह बचकाना सपना है। और यह विस्मयकारी है कि हम हकीकत के सामने बड़ी ज़िद से अडे रहते हैं। कोई भी, वह वर्तमान में आपका साथी हो या भविष्य में होने वाला सपनों का राजकुमार, आपको थाल में खुशियां परोसने के लिए बाध्य नहीं है--और न ही वे चाहकर भी ऐसा कर नहीं सकते। असली प्रेम हमारी जरूरतों के लिए दूसरों पर निर्भर होने से नहीं आता, बल्कि हमारी अपनी भीतरी समृद्धि और प्रौढ़ता को विकसित करने से आता है। तब हमारे पास इतना प्रेम होता है देने के लिए कि हम स्वतः ही प्रेमियों को अपनी तरफ खींचते हैं।

5 पाठको ने कहा ...

  1. पाठको से अनुरोध है की ब्लॉग पर तिप्प्निया करने का कष्ट करे क्योकि असली प्रसंशा टिप्पणियाँ ही होती है

  2. आप एक सराहनीय कार्य कर रहे हैं जी
    ओशो की देशना, उनके प्रवचनों, उनके दर्शन और उनके विचारों को ब्लाग के माध्यम से हम तक पहुंचाना एक बहुत बडा कार्य है। मैं इस ब्लाग की सभी पोस्टें नियमित पढता हूं। आपको यह सब लिखने में कितना आनन्द आता होगा यह मैं समझ सकता हूं। ओशो को पढना ही इतना आन्नदित कर देता है कि क्या टिप्पणी करुं? मैं खुद ऐसा ही एक ब्लाग बनाना चाहता था, लेकिन ओशो फांऊडेशन के सर्वाधिकार सुरक्षित कापीराईट के कारण नहीं बनाया।
    आशा है आप इसी तरह यह अमृत हमें पिलाते रहेंगें।

    प्रणाम स्वीकार करें

  3. आदरणीय
    हो सके तो कृप्या वर्ड वेरिफिकेशन हटा दें।
    आभार

  4. अंतर साहिल जी आपकी प्रंसंशा के लिए धन्यवाद
    कृपया वर्ड वरिफिकेशन हटाने का तरीका बताये

  5. आभार आप सभी पाठको का ....
    सभी सुधि पाठको से निवेदन है कृपया २ सप्ताह से ज्यादा पुरानी पोस्ट पर टिप्पणिया न करे
    और अगर करनी ही है तो उसकी एक copy नई पोस्ट पर भी कर दे
    ताकि टिप्पणीकर्ता को धन्यवाद दिया जा सके

    ओशो रजनीश

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