" मेरा पूरा प्रयास एक नयी शुरुआत करने का है। इस से विश्व- भर में मेरी आलोचना निश्चित है. लेकिन इससे कोई फर्क नहीं पड़ता "

"ओशो ने अपने देश व पूरे विश्व को वह अंतर्दॄष्टि दी है जिस पर सबको गर्व होना चाहिए।"....... भारत के भूतपूर्व प्रधानमंत्री, श्री चंद्रशेखर

"ओशो जैसे जागृत पुरुष समय से पहले आ जाते हैं। यह शुभ है कि युवा वर्ग में उनका साहित्य अधिक लोकप्रिय हो रहा है।" ...... के.आर. नारायणन, भारत के भूतपूर्व राष्ट्रपति,

"ओशो एक जागृत पुरुष हैं जो विकासशील चेतना के मुश्किल दौर में उबरने के लिये मानवता कि हर संभव सहायता कर रहे हैं।"...... दलाई लामा

"वे इस सदी के अत्यंत अनूठे और प्रबुद्ध आध्यात्मिकतावादी पुरुष हैं। उनकी व्याख्याएं बौद्ध-धर्म के सत्य का सार-सूत्र हैं।" ....... काज़ूयोशी कीनो, जापान में बौद्ध धर्म के आचार्य

"आज से कुछ ही वर्षों के भीतर ओशो का संदेश विश्वभर में सुनाई देगा। वे भारत में जन्में सर्वाधिक मौलिक विचारक हैं" ..... खुशवंत सिंह, लेखक और इतिहासकार

प्रकाशक : ओशो रजनीश | शनिवार, फ़रवरी 20, 2010 | 4 टिप्पणियाँ



अतीत जा चुका और भविष्य अभी आया नहीं : दोनों ही दिशाओं को अस्तित्व नहीं है उधर जाना बेवहज है। कभी एक दिशा होती थी, लेकिन अब नहीं है, और एक अभी होना शुरू भी नहीं हुई है। सही व्यक्ति सिर्फ वही है जो क्षण-क्षण जीता है, जिसका तीर क्षण की तरफ होता है, जो हमेशा अभी और यहां है; जहां कहीं वह है, उसकी संपूर्ण चेतना, उसका पूर्ण होना, यहां के यथार्थ और अभी के यथार्थ में होता है। यही एकमात्र सही दिशा है। सिर्फ ऐसा ही व्यक्ति स्वर्ण द्वार में प्रवेश कर सकता है। वर्तमान ही वह स्वर्ण द्वार है। यहां-अभी स्वर्ण द्वार है...और तुम तभी वर्तमान में हो सकते हो जब तुम महत्वाकांक्षी नहीं हो--कुछ पाने की इच्छा नहीं रखत: शक्ति, धन, सम्मान, बुद्धत्व तक भी को पाने की कोई चाह नहीं क्योंकि सभी महत्वाकांक्षाएं तुम्हें भविष्य में ले जाती हैं। सिर्फ गैर-महत्वाकांक्षी व्यक्ति वर्तमान में हो सकता है। जो व्यक्ति वर्तमान में होना चाहता है उसे सोचना नहीं चाहिए, वह सिर्फ द्वार को देखे और प्रवेश कर जाए। अनुभव होगा, परंतु अनुभव के बारे में पहले से सोचना नहीं चाहिए। जैसे यह व्यक्ति पत्थरों पर चलता है, वह हल्के से और गैर-गंभीरता से कदम उठाता है, और इसी के साथ पूरी तरह से संतुलित और सजग। वर्तुलाकार घूमते हुए सतत प्रवाहमान पानी के पीछे, हम इमारतों के आकार देख सकते हैं; प्रतीत होता है कि पृष्ठभूमि में कोई शहर है। व्यक्ति बीच बाजार में है लेकिन साथ ही इसके बाहर भी है, अपना संतुलन बनाए हुए है और साक्षी होने में समर्थ है। यह कार्ड हमें चुनौती देता है कि हम जो दूसरे स्थल और समय के बारे में सोचते रहे हैं उससे बाज आएं, और इस बात के प्रति सजग रहें कि अभी और यहां क्या हो रहा है। जीवन एक महान अवसर है जहां आप खेल सकते हैं यदि आप अपने मूल्यांकन, चुनाव और अपने लंबे समय की योजनाओं से मोह छोड़ दें। जो आपकी राह में आता है, जैसे आता है उसके लिए उपलब्ध रहें। और चिंता ना लें यदि आप ठोकर खाते हैं या गिर जाते हैं; बस अपने को उठा लें, धूल झाड़ लें, ठठाकर हंस लें, और फिर चल पड़ें।

ओशो
दि ग्रेट झेन मास्टर

4 पाठको ने कहा ...

  1. ओशो जहां भी पाखंड व आडंबर देखते हैं उसे बेनकाब करते हैं l ओशो जहां भी पाखंड व आडंबर देखते हैं उसे बेनकाब करते हैं

  2. ओशो एक जागृत पुरुष हैं जो विकासशील चेतना के मुश्किल दौर में उबरने के लिये मानवता कि हर संभव सहायता कर रहे हैं

  3. मैने ओशो की अधिकतम पुस्तकें पढ़ी हैं और उनके प्रवचनों की कैसेट्स सुनी हैं, और बेशक अध्यात्मिक परंपरा में वे एक अद्वितीय प्रज्ञा हैं और एक ऐसा व्यक्तित्व जिसमें अनुप्रेरित करने की अद्भुत सामर्थ्य है।

  4. आभार आप सभी पाठको का ....
    सभी सुधि पाठको से निवेदन है कृपया २ सप्ताह से ज्यादा पुरानी पोस्ट पर टिप्पणिया न करे
    और अगर करनी ही है तो उसकी एक copy नई पोस्ट पर भी कर दे
    ताकि टिप्पणीकर्ता को धन्यवाद दिया जा सके

    ओशो रजनीश

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